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Bhabhuta sidh Maharaj main Mandir Situated In Kali Nadi, Bikaner District. Bhabhuta Sidh maharaj many Dham/Temple in Gujrat, Haryana, Rajasthan and Aslo some Place in Pakistan that Near in Gujrat Border. Bhbhuta sidh Fair Come Every Year In Bhato Chath (September) this year Bhabhuta sidh mela Come in Upcoming 4 September 2019
श्री जोतराम जी की सत्य कथा भनीण से पहली बार माता राजकौर की जुबानी, “बाबा जोतराम जी की सच्ची कहानी। ” के नाम से प्रकाशित की गयी। जिसमे माता राजकौर और उनके पुत्र रामस्वरूप ने जो बताया, वह लिखा गया है।
श्री जोतराम जी का जीवन
श्री जोतराम जी का मुख्य कार्य खेती करना था और कभी कभी भेद बकरी भी चराते थे। जोतराम जी प्रतिदिन स्नान करके भोजन ग्रहण करते थे। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हरिद्वार से पंडित हर वर्ष यहाँ राजस्थान के गावँ में यजमानो के पास दान-दक्षिणा लेने के लिए आते थे। जोतराम जी ने बद्रीनाथ के पंडित दयानंद शर्मा को अपना गुरु बनाया था। और हर वर्ष अपनी सारधानुसार गुरु दक्षिणा देते थे। जोतराम जी अपने जीवन में भभूता सिद्ध, गोगाजी एंव रामदेव जी की सेवा पूजा करते थे। जोतराम जी की एक बार अपने जीवनकाल में आँखे ख़राब हो गयी थी। तब इन्होने रामदेवजी से प्राथना की थी की यदि मेरी आँखे ठीक हो जाएगी तो में आपके धाम रामदेवरा जाकर धोक लगा कर आऊंगा। जोतराम जी की आँखे ठीक हो जाने पर वि.सं. 2016 (सन 1956 ) को रामदेवजी के मुख्य धाम रामदेवरा (रूणिचा) धोक लगाकर आये थे।
जोतराम जी अपने मानव जीवनकाल में देवत्व की शक्तिया आ गयी थी। एक बार अपनी भेड़े चरा रहे थे तब एक भेद बीमार हो गयी और जोतरमा जी ने उसका उपचार किया तो वो भेद ठीक हो गयी। बाबा जोतराम जी ने प्रथम इलाज इसी एक भेद का किया था।
जोतराम जी प्रतिवर्ष भादवा महीने में गोगाजी, रामदेवजी, भभूता सिद्ध की अपने घर पर ज्योत-बत्ती करते थे। ये प्रतिवर्ष भादवा महीने में गोगामेड़ी धाम पर धोक लगाकर आते थे इसी क्रम में वि.सं. 2016 (सन 1959 ) को जोतराम जी गोगामेड़ी जाने के लिए तैयार हुए लेकिन घरवालों ने कहा की इस वर्ष खेतीबाड़ी का काम ज्यादा है। इसलिए आप इस साल गोगामेड़ी ना जाकर अगले साल चले जाना। जोतराम जी की इच्छा गोगामेड़ी जाने की थी, लेकिन पिताजी के मना करने पर अपने दोस्तों को लेकर खेत पर चले जाते है।
भादवा सुदी नवमी शुक्रवार को पूरा सिन खेत में काम करने के बाद जोतराम जी शाम को घर आ जाते है और रात का भोजन करने के बात जोतराम जी अपने घर पर दोस्तों के साथ हुक्का पी रहे थे। इस समय रात्रि के 9:30 बजे काला नाग जोतराम जी को काट लेता है।
जोतराम जी का उपचार करवाने के लिए घरवालों ने हाकिम वैद बुलाये और पूरी रात उपचार करते रहे। लेकिन इनकी तबीयत ठीक नहीं हुयी।
तब गावँ के जुगलाल पंडित जो जोतराम जी के मित्र थे उन्होंने देसी उपचार किया लेकिन उस पारलौकिक शक्ति के आगे किसी का उपचार काम नहीं आया और जो होना था वही हुआ। भादवा सुदी दशमी शनिवार को लगभग सुबह 10 बजे के जोतराम जी ने प्राण त्याग दिए। तब गोगाजी महाराज, जोतराम जी को लेकर भभूता सिद्ध के पास ले जाकर कहते है की इसको अपना शिष्य बनाकर घोर कलयुग के दीन-दुखियो के दुखो का निवारण करवाओ और बाबा जोतराम ने भभूता सिद्ध जी को अपना गुरु धारण कर लिया। इधर जोतराम जी का शरीर निर्जीव हो जाता है। घर में सन्नाटा छा जाता है और सनातम धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। उस समय जोतराम जी की पत्नी अपने पीहर गयी हुयी थी। पिता सुल्तानाराम को बहुत अफ़सोस होता है यदि जोतराम को गोगामेड़ी जाने से नहीं रोकते तो ऐसा नहीं होता। जब जोतराम जी ने अपना शरीर छोड़ा उस समय उनकी आयु 27 वर्ष की थी और उनके बड़े पुत्र हरिसिंह 4 वर्ष और छोटे बेटे रामस्वरूप 11 महीने के थे।
कुछ समय गुजरने के बाद (लगभग 20 दिन ) जोतराम जी के खेत के पडोसी इन्द्राज भाकर के खेत में उनके सामने आकर खड़े हो गए और बोले भाई इन्द्राज में मारा नहीं हूँ। तुम हमारे घर पर जाकर घरवालों से कह देना की पंडितो द्वारा गायत्री मंत्र जाप करवाकर मेरी पूजा सुरु कर दे। में आप सबकी सहायता करूँगा। इन्द्राज भाकर जोतराम को सामने देखकर सोच रहे थे की जोतराम तो मर गया। यह मैंने किसको देख रहा हूँ। यह कौन बोल रहा है ? बस इतने में ही जोतराम जी गायब हो गए। इन्द्राज बहकर ने मन ही मन सोचा जिनका जवान लड़का गुजर हो। अगर मैं उनको यह बात बताऊंगा तो जोतराम के घर वालो को बुरा लगेगा और वे विश्वास भी नहीं करेंगे। इसलिए इन्द्राज भाकर ने इस बात की चर्चा किसी से नहीं की।
इसके कुछ समय बाद ऐसी ही घटनाये इन्द्राज गोदारा (जो की शिरोमणी भगत के नाम से प्रसिद्ध हुए ) के साथ हुयी। इन्होने इस घटना की चर्चा अपने घरवालों से की लेकिन जोतराम के हरवालो को कुछ नहीं बताया।
इसके बाद जोतराम जी भनीण गावँ में अपने पुराने घर पर भाई दूल्हाराम के मुचक से बोलकर कहा की मैंने इन्द्राज भाकर और इन्द्राज गोदारा को बताया था की तुम हमारे घर जाकर मेरे बारे में बताना, मैं मरा नहीं हूँ और इस संसार में दुखी होकर घूम रहा हूँ। आप पंडितो के द्वारा गायत्री मंत्रो का जाप करवा के मेरी आत्मा को शुद्ध कीजिये। मैं आप सभी की बहुत सहायता करूँगा और गुरु भभूता सिद्ध के आशीर्वाद से इस संसार के सभी दीन दुखियो के दुखो का निवारण करूँगा। इसके बाद जोतराम जी के पिताजी ने पंडितो से गायत्री मंत्र जाप के द्धारा देव स्थापना प्रकिर्या हवन आदि करवा कर शक्ति स्थापित कर देव रूप में मनाने लगे।
श्री होत्रम देव रूप में आने के बाद एक दिन अपने भाई दुल्हाराम के मुख बोलकर कहा की जब में शरीर त्यागकर देवलोक में गया तो वहाँ से मुझे सभी देवतागण भगाने लगे लेकिन मैं शाँत रहा और गुरु भभूता सिद्ध का स्मरण करता फिर भभूता सिद्ध को गुरु बनाकर अब संसार के दीन दुखियो की सेवा करने के लिए आया हूँ। आप चाँदनी नवमी को मेरा जागरण लगाकर और सुबह दशमी के दिन खीर का भोग लगाकर श्रद्धानुसार प्रसाद बाँटना। तभी माता राजकौर को कहा की आपको कोई परेशानी हो तो बस मेरा नाम पुकारना और मैं आपकी सहायता करूँगा। माता राजकौर बताती थी की मेरे को कोई भी परेशानी होती तो मैं आपके दादा जोतराम के आगे हाथ जोड़कर विनती करती थी की हे भगवन इस संसार में मेरी सहायता करने वाले तो आप ही है तो मेरी परेशानी तुरंत दूर हो जाती थी
बाबा जोतरामजी ने देवरूप में आने के बाद भगत दुल्हाराम के माध्यम से अनेक चमत्कार दिखाए और कैंसर, बांझपन आदि असाध्य रोगो का निवारण किया। भगत दुल्हाराम के अलावा ढाणी मेघसर के भगत गोपाल पंडा नाई और झोथड़ा के भगत मोहरसिंह के द्वारा बाबा ने अनेक चमत्कार दिखलाये। आज श्री जोतराम जी के 500 से ज्यादा धाम हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, उत्तरप्रदेश में बने हुए है जहां पर जोतराम बाबा भगतो के मुख बोल कर दुखियो के दुखो का निवारण करते है।
श्री जोतराम जी का मुख्य मंदिर -Jotram Main Temple
श्री जोतराम के देव रूप में आने के बाद सभी परिवार वाले जोतराम को मनाने लगे। तभी एक दिन दूल्हा राम भगत के माध्यम से पिता सुल्तानाराम ने पूछा की “बेटा हम तुम्हारा मंदिर बनाना चाहते है। आपका मंदिर किस जगह पर बनना चाहिए ?” तब जोतराम जी ने पिताजी से कहा की मेरा मंदिर उसी जगह बना दो जहाँ पर वर्तमान में भनीण गावँ में मेरा मुख्य धाम के नाम से मंदिर बना हुआ है। भनीण के मुख्य धाम का स्थान स्वयम जोतराम दवारा चुना हुआ है और इस संसार में बाबा जोतराम का यह प्रथम मंदिर बना। श्री जोतराम जोतराम जी ने कहा जो सेवक सच्चे मन और सच्ची सारधा भाव से भनीण पर धोक लगाएगा उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होगी।
मंदिर का निर्माण -Temple Construction
उस समय श्री जोतराम जी के सभी परिवार वालो ने छोटे से मंदिर का निर्माण करवाया और मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण श्री जोतराम जी के सभी भगतो और सेवको के सहयोग से किया जा रहा है। भनीण धाम पर धर्मशाला का निर्माण भी सभी सेवको एंव भगतो के सहयोग से श्री जोतराम सेवा समिति भनीण की देख रेख में किया जा रहा है। भनीण
भनीण मंदिर कैसे पहुंचा जाए? How to reach Bhanin Temple
बाबा जोतराम जी का जन्म भनीण गाँव ( तारानगर तहसील ,चूरू जिला , राजस्थान ) में चौधरी सुल्तान राम गोदारा के घर माता कस्तूरी देवी जी की कोख से हुआ । जोतराम जी बचपन से ही शीतल स्वभाव व् संत प्रविती के थे । धार्मिक विचारो व ईश्वर के प्रति उनका विशेष लगाव था । जोतराम जी के बाद उनके तीन भाई और चार बहनो ने माता कस्तूरी देवी की कोख से जन्म लिया । जिनके नाम क्रमशः थे – चौधरी झाबर राम , चौधरी लाधुराम , चौधरी हरदयाल है । व बहनो में नंदकौर , सजना , झड़िया व सोना है।जोतराम जी को अपनी बहन सजना से बहुत लगाव था ,
बचपन में एक बार उनकी आँखे दुखनी आ गयी थी तब से वे राम भजन में ज्यादा धयान देने लगे । इनका मुख्य कार्य खेती करना था , परन्तु जोतराम जी अपनी भेड़ बकरियो को स्वयं ही जंगल चराने ले जाते थे । 18 वर्ष की आयु में इनका विवाह सरदार शहर के गांव बिल्यू बिगोरा के चौधरी जिया राम की सुपुत्री राजकौर सिहाग से संपन्न हुआ । समय – समय पर माता राजकौर सिहाग ने दो पुत्रो को जन्म दिया जिनके नाम हरी सिंह व राम स्वरूप रखे गए , जोतराम जी ने 8 वर्ष तक गृहस्थ धर्म का पालन किया इसके बाद इसके बाद उनका मन गृहस्थी से उचाट हो गया , अब वो अपना ज्यादा समय जंगल में पशुओ को चराने में ही व्यतीत करने लगे।
एक दिन जंगल में पशु चराते समय इनकी मुलाकात गांव गांव गिरासर सोंलकी ढाणी के गोविन्द सिंह सोलंकी के सुपुत्र गुरु भभूता सिद्ध महाराज से हुयी ।(आपको बता दे की गुरु भभूता सिद्ध जी महाराज सूक्ष्म शरीर में जंगल में घूम रहे थे तब उन्होंने पशु चराते हुवे जोतराम जी को देखा और शरीर धारण करके जोतराम जी से मिले )इनसे मिलकर जोतराम जी महाराज अत्याधिक प्रभावित हुए और गुरु भभूता सिद्ध महाराज जी से अपना शिष्य बना लेने की अभिलाषा प्रकट की , गुरु भभूता सिद्ध महाराज भी जोतराम जी से प्रभावित हुए और उन्हें आभाष हो गया की जोतराम ही तेरे परमार्थ के कार्य में सहायक सिद्ध होंगे । भभूता सिद्ध जी ने जोतराम जी के सर पर हाथ रखा व विधि पूर्वक उन्हें दिखा दी ।जोतराम जी अपने पशुवो की चिंता छोड़ तन मन से गुरु महाराज की सेवा में समर्पित हो गए ।
गुरु संगति से उनके मन में वैराग्य जागा व परमार्थ करने की उमंग पैदा हुई ।एक दिन जोतां जी ने गुरु भभूता सिद्ध जी महाराज से अपने मन की इच्छा जताई और कहा गुरु जी इस संसार में लोग बहुत दुखी है , अगर आपकी इजाजत हो और आपका आदेश हो तो में दीन दुखियो के दुख दर्द दूर करना चाहता हु । तब गुरु भभूता सिद्ध महाराज जी ने कहा ” जोतराम ये घोर कलयुग है ऐसा करने के लिए तुझे ये हाड मांस का बना पांच तत्व का ये शरीर छोड़ना पड़ेगा क्या तुम ऐसा कर सकोगे ?”तब जोतराम जी ने उत्तर दिया “हे गुरु देव अगर आपकी कृपा हो जाये तो इस कारण के वास्ते में एक शरीर तो क्या मै हज़ार शरीर छोड़ने को तैयार हूँ मुझे इस नश्वर शरीर का कोई मोह नही है मुझे आपकी सभी सर्त मंजूर है , परमार्थ के कार्य के लिए मई हर बंधन तोड़ दूँगा” ।तब भभूता सिद्ध महाराज बहुत खुश हुए ओर कहा “धन – धन तेरे माता पिता को जिन्होंने तेरे जैसे सपूत को जन्म दिया आज तुझे पाकर मेरा ये जोग धन्य हो गया । मै तुझे आशीर्वाद देता हु तेरा नाम चारो कुंटो में अमर होगा “।आठ वर्ष गृहस्थ धर्म निभाने के बाद आखिर वो समय आ गया जब भभूता सिद्ध महाराज के बताये अनुसार शनिवार के दिन भादवा उतरनी दसे (दशमी ) को पीवणा द्वारा (साँप के छाती पर बैठकर साँस पिने से ) जोतराम जी ने सुबह 10 बजे सूरज निकलने के बाद नश्वर शरीर को त्याग दिया ।
शरीर को त्यागने के बाद जोतराम जी की आत्मा बहन सजना के घर गाँव बिल्यू पहुँची, दरवाजा खटखटा के सजना को जगाया वो बड़बड़ाती आँखे मल्टी आयी और बोली क्या हुआ सब ठीक तो है जोतराम जी साक्षात रूबरू खड़े होकर सजना को परचा दिया और बोले मुझको छोड़कर सब ठीक है माँ ने तुझे भनीण बुलाया है जल्दी आ जाना में जा रहा हु। जब सजना भनीण पहुंची तो वहाँ का नज़ारा देखकर विस्मित रह गयी चारो तरफ सन्नाटा छाया हुआ था वहाँ उसे जोतरंजोतरं जी का निर्जीव शरीर लेटा हुआ दिखा । सजना समझ गयी की उसके भाई की आत्मा उसके पास आयी थी और वह दहाड़े मार कर रोने लगी । जोतराम जी की ज्योति गुरु भभूता सिद्ध महाराज जी की ज्योति में लीन हो गयी ॥शरीर त्यागने के एक साल बाद जोतराम जी भाई दूल्हा राम जी के मुख बोले इसके बाद बुद्धराम गोदारा ,चंद्रो व सावत्री जी व गुगनराम जी के मुख बोले व कई चमत्कार दिखलाये जिन्हें देख कर सभी लोग हैरान रह गए ।
यू तो भनीण गाँव में घर घर में जोतराम जी का स्थान बना हुआ है, लकिन मुख्य मंदिर भनीण में घुसते ही बाबा जोतराम जी के नाम से प्रसिद्ध है जो की सबसे प्राचीन है भनीण में चैत सुदी दसे भादो दसे का मेला भरता हैदूर दूर से भगत लोग चमत्कार सुन कर आने लगे लकिन ग्यारह साल तक जोतराम जी का नाम एक ही इलाके में सिमट कर रह गया । तब बाबा जोतराम जी अपने गुरु भभूता सिद्ध महाराज से बोले हे गुरु देव आपने वचन दिया था की तेरा नाम चारो कुंटो में अमर होगा मैंने अपना वचन निभा दिया है अब आप अपना वचन पूरा करो तब भभूता सिद्ध महाराज जोतराम जी को लेकर कैलाश पर्वत शिवशंकर भगवन के पास पहुंचे।शंकर भगवन की समाधी लगी हुई थी वो अपने ध्यान में मगन थे जब उन्होंने अपने आँखे खोली तो भभूत सिद्ध महादेव के चरनोचरनो में वंदना करके बोले हे गुरु देव भोले भंडारी मैंने अपने शिष्य को वचन दे दिया है उसे पूरा करो इसका नाम चारो कुंटो में अमर कर दो ।
तब तब शंकर भगवान ने भभूता सिद्ध जी से कहा सिद्ध का वचन सिद्ध होता है । इसका नाम चार कुंटो में अमर होगा परन्तु एक अड़चन है तेरा ये चेला संसार में फैले ऊंच नीच के भेदभाव को भुला कर किसी अछूत के मुख बोलेगा तो इसका नाम अवश्य ही चार कुंटो में अमर होगा । तब जोतां जी ने शंकर भगवान के चरणों को स्पर्श करके कहा मुझे मंजूर है मै नीची जात वाले के मुख बोलूंगा मगर मेरी आपसे ये प्राथना है मुझे आशीर्वाद देकर ये वरदान दीजिये की दुनिया का कोई भी तांत्रिक स्याणा सेवड़ा अघोरी या जादूगर हम को अपने बस में न कर सके व अपना जादू टोन का इल्म हम पर ना चला सके । तब शंकर भगवन ने कहा तथास्तु ऐसा ही होगा । जाओ तांती भभूती देकर दुखियो के दुःख दर्द मिटाओ और मदिरा का परहेज बताओ कोई भी बहुत प्रेत जींद जादू टोना करवाया हुआ तुम्हारे सामने नही टिक सकेगा आपको इस कथा में कोई कमी या गलती मिलती है तो हमे कमेंट बॉक्स में लिखे
लेखक – मास्टर जगदीश लाल सारस्वतयह कथा मास्टर जगदीश लाल सारस्वत जी की पुस्तक से ली गयी है Jotram.com
“घर में देवी देवताओ के फोटो लगाते समय ये बाते ध्यान रखे – VASTU TIPS “
सभी के घर में देवी-देवताओं की अनेक मूर्तियां और तस्वीरें लगी होती हैं, लेकिन वे मूर्तियां और तस्वीर वास्तु के अनुसार घर में सुख-समृद्धि लाने के अनुकूल है या नहीं, यह बात कोई नहीं जानता। वास्तु के अनुसार, देवी देवताओं की मूर्तियां घर में किस रूप में है और कहां पर स्थापित है, यह बात घर की सुख-समृद्धि और धन आदि पर बहुत असर डालती है। इसलिए जब भी घर में देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित करें तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है।
1. घर के मंदिर में भगवान कृष्ण की बालरूपी बैठी हुई मूर्ति रखना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अलावा अगर श्रीकृष्ण और देवी राधा की जुगल-जोड़ी हो तो ऐसी मूर्ति खड़ी मूद्रा की भी रखी जा सकती है।
2. घर में भगवान गणेश की केसरिया या पीले रंग के वस्त्र बनती मूर्ति रखना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा नृत्य करती गणेश प्रतिमा भी घर में शुभ अवसर लाती है।
3. घर में देवी लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कुबेर की मूर्ति कभी खड़ी नहीं होनी चाहिए। इनका बैठा होना शुभ और लाभदायक होता है। भगवान कुबेर और देवी लक्ष्मी की मूर्ति को मंदिर की उत्तर दिशा में स्थापित करना शुभ होता है।
4. अगर घर में भगवान शिव की स्थापना करना चाहते हैं तो शिवलिंग की जगह शिव मूर्ति या तस्वीर रखें। घर में शिव मूर्ति रखना अच्छा माना जाता है।
5. अगर घर में भगवान श्रीराम की मूर्ति रखना चाहते है तो ध्यान रखें श्रीराम के साथ माता जानकी और भगवान हनुमान की भी स्थापना करें। इससे घर में प्रेम बना रहता है।
6. घर के मंदिर में भगवान सूर्य की मूर्ति या तस्वीर की जगह अगर तांबे की सूर्य आकृति रखी जाए तो यह ज्यादा फलदायक माना जाता है।
7. यदि घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखी हो तो ध्यान रखें कि उनके साथ देवी लक्ष्मी की स्थापना भी जरूर की जाए। भगवान विष्णु वहीं निवास करते हैं , यहां देवी लक्ष्मी उनके साथ हो।
8. घर में यदि भगवान हनुमान की मूर्ति हो तो ध्यान रखें कि उस मूर्ति में भगवान हनुमान पर्वत उठाते या अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते दिखाई दें।
9. काली की विकराल छवि वाली मूर्ति जिनमें देवी काली का बायां पैर भगवान शिव के ऊपर रहता है ऐसी मूर्ति भी घर में होना अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसी मूर्ति को श्मशान काली माना जाता है जो विध्वंश का प्रतीक हैं।
10. मंदिर में विशेष रूप से ध्यान रखें किसी भी भगवान की मूर्ति या तस्वीर को सीधे जमीन पर न रखें। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। मूर्तियों को कपड़े या थाली आदि में स्थापित करें।
Nakhat Banna बन्ना जी की मान्यता पुरे राजस्थान में है ,जब भभूता सिद्ध जी ने अपना शरीर छोड़ा था उस वक़्त एक भविष्य वाणी हुयी थी की तुम्हारे परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी पीर पैदा होते रहेंगे , और उसी भविष्य वाणी के के कारण समय आने पर नखत बन्ना सा जो की भभूता सिद्ध जी के पोते थे उन्होंने शरीर छोड़ा और देव जूनी में आ गए , आज पुरे राजस्थान में इनके चमत्कार देखे जाते है ,
Nakhat banna Story : Rajasthan के जेसलमेर District के गाँव गिरासर की ढाणी सोलंकी के रहने वाले गोविंद सिंह जी के कोई ओलद नहीं थी | वे Rajput जाति से Belong करते थे Niranjan Nath जी ने किर्पा करके धुणे की भभूति गोविन्द सिंह जी को दी थी भभूती के प्रताप से Govind Singh Solanki के यहाँ समय के साथ 4 बच्चो ने जन्म लिया जिनके नाम Bhabhuta, Sher Singh, Narsingh और बेटी का नाम सिंगारो रखा गया। Bhabhuta Sidh जी के Kali Nadi मे शरीर त्यागने के कुछ समय बाद जिस जगह भभूता Sidh जी का रिश्ता किया गया था वहां उनके छोटे भाई शेरसिंह का विवाह किया गया। शेर सिंह जी के पुत्र अलसी सिंह जी के 3 पुत्रो ने जन्म लिया प्रलाद Singh जी , जबर Singh जी और कानाह Singh जी, प्रलाद सिंह जी का Shaadi के 2 महीने बाद ही देहांत हो गया। कानाह सिंह जी के यहाँ सबसे पहले पुत्री ने जन्म लिया जिसका नाम सुगना कंवर रखा गया। दूसरे नंबर पर Nakhat Banna ने जन्म लिया। उनके बाद Bhagwan Singh जी, भीख Singh जी, रूप singh जी, बाबू singh जी और जीवण singh जी पाँच भाइयों ने जन्म लिया।
ये 7 भाई बहन थे। कानाह Singh जी की Family मे मांस और शराब का नाम तक नहीं लिया जाता अगर कोई रिस्तेदार शराब पिया हुआ मिल जाए तो ये लोग उससे कोई बात नहीं करते ये उनकी विषेश नियम धारा है | दादी सा श्रीमति बादल देवी के बताए अनुसार कानाह सिंह जी की धर्म पत्नी का नाम सीरिया देवी था जोकि ग्राम गिरासर की थी | Nakhat Banna का जन्म विक्रम संवत 2011 मे फागुन लगते तीज मंगलवार को हुआ था। Nakhat Banna sa Solanki Dhani की मिट्टी मे खेल कूदकर बड़े हुए, इन्होने 2 -3 साल तक होमगार्ड की नौकरी की , ये अपने गांव के वफादार और ईमानदार होने के कारण संवत 2025 -26 मे गेंग का पूरा काम नखत Banna sa को सौपा गया था और उनके अंतिम Time तक अकाल राहत के मिस्टरोल Nakhat बन्ना सा के पास थे | एक बार Nakhat Banna सा के बीमार होने के कारण काम पर ना जाने के कारण चार-पाँच लोग बन्ना सा की ढनी पहुंचे और हाथ जोड़कर कहा कि Banna sa आपके काम पर ना होने के कारण पाँच-सात दिन से हमारी Attendance भी नहीं भरी गई, तब नखत बन्ना सा ने जवाब दिया कि आप लोग अपनी हाजरियों का मिस्टरोल ले जाओ व मेरी बाट मत देखना, मुझे तो अब सांप पकड़ने हैं और हाथ को छत की तरफ करते हुए कहां “ देखो वो जा रहे है सांप ” ये Nakhat बन्ना सा के आंखरी शब्द थे।
Nakhat Banna जब गाँव वालों को मिस्टरोल ले जाने को कहा तो अनपढ़ लोग कहने लगे कि आपके इन मिस्टरोल मे झूठ सच होगी तो हम गरीब लोग फंस जाएंगे। लेकिन banna sa ने उनको कहा कि इसमे रत्ती भर भी झूठ नहीं है तुम इन्हे ले जाओ। इसके बाद तीसरे दिन विक्रम संवत 2026 के दस्वे दिन चैत महा लगते ही वीरवार को साधारण बुखार मे अपना शरीर त्याग दिया। घर मे हाहाकार मच गया। घर मे सबसे बड़ा लड़का वो भी 17 साल की उम्र मे मामूली बुखार मे चल बसे इससे बढ़कर ओर क्या दुख होगा ? कानाह सिंह जी को इस घटना से बड़ा झटका लगा उनका मन विचलित हो गया। उन्हे इस बात का बेहद अफसोस हुआ कि 40 साल से दादा Bhabhuta Sidh की सेवा तन मन धन से कर रहे थे ओर मेले मे हर साल काली नाड़ी भी थे जिसका मुझे आज ये फल मिला लेकिन भगवान की मर्जी के आगे किसकी चलती है। सेवा पूजा अब दादी ने संभाली लेकिन दादा सा ने उस गम गो भुलवा दिया ओर कहा कि सेवा मत छोडना तुम्हारे घर के आगे मेला लगेगा। तब नखत बन्ना सा के पिता मन कुछ तसल्ली मिली। विक्रम संवत 2036 में नखत बन्ना अपनी बहन सुगना के मुख बोले और कहा “मैं नखत हु ओर मेरा स्थान बोरटी के पास बनाओ “।
नखत बन्ना चमत्कार 1:-एक परिवार मे बच्चे को सांप ने काट लिया और वह मर गया था। तब श्री नखत बन्ना सा स्वम वहाँ मोलिया साफा और हाथ मे चुटिया रस्सी लेकर पहुंचे ओर कहा “कि मुझे पानी पिलाओ “इस पर वहाँ मोजूद लोगों ने कहा कि भाई यहाँ तो एकलोता लड़का मरा पड़ा है आप पास वाले घर मे पानी पिलो बन्ना सा आँगन मे पहुंचे ओर शव के ऊपर से कपड़ा हटाते हुए कहा कि भाई उठजा इतनी गहरी नींद मत लो, लड़का जीवित खड़ा हो गया और सभी लोग हैरान रह गए ओर पुंछने लगे कि आप कौन है ? तब उन्होने कहा कि मैं कानाह सिंह जी सोलंकी का लड़का हूँ ओर चारणवाला नहर के पास मेरी ढनी है, आपका भला हुआ है तो ढनी के पास मे बोरटी व्रक्ष कि फेरी लगाने इस लड़के को ले आना ,इतना कहकर Banna सा ने पानी नहीं पिया और घर के बाहर चले गए। वे लोग पुंछते – पुंछते गए ओर फेरी लगाई तब से वह लड़का भदवे की शूकल पक्ष की चौथ को वहाँ फेरी लगाने आता है और हमेशा आता रहेगा।
नखत बन्ना चमत्कार 2 :- नखत बन्ना सा के चमत्कार सुनकर अंधी दादी सा बादल देवी ने कहा “ नखतू लोग कहते है हमारा भला होता है और Nakhat Sidh है, तो मुझे भी आंखे दे दे, मुझे भी विश्वास हो जाएगा की हमारा नखत सिंह सिद्ध हो गया है ” दूसरे दिन प्रातः तीन बजे दादी सा को नखत सिंह ने पूकारा दादी उठ जा तुझे दिखाई देगा ओर बिलोना शुरू कर दे। दादी सा ने पुंछा तू कौन है भाई ? तो नखत बन्ना सा ने जवाब दिया कि मैं नखत हूँ। लेकिन दादी को विश्वास नहीं हुआ और उन्होने कहा वह तो 10 साल पहले संसार छोड़ चुका है अब नखतू कहाँ ? दादी सा आप बाहर आजाओ आपने कल याद किया था कि नखत सिद्ध होवे तो मुझे भी आंखे क्यों नहीं देता – मैं आपको आंखे देने आया हूँ , तब दादी सा उठी ओर उन्हे दिखने लगा था। वे बड़ी खुश हुई, सवेरे जब पोतों की बहुए उठी तो दादी सा को देख हंस पड़ी ओर फिर उन्हे हेरनी हुई जब उन्हे मालूम हुआ कि बन्ना सा ने दादी को आंखे दी हैं। विक्रम संवत 2036 भदवे की चाँदनी छट का कालिया नाड़ी का मेला पूरा करके जब कानाह सिंह जी घर पहुंचे तब दादी सा बाहर आगाई ओर अपनी आप बीती सुनाई।
नखत बन्ना चमत्कार 3 :- एक दिन काका सा जबर सिंह जी ने कहा मेरी गाय 3 साल से गायब है अगर वो मिल जाए तो Nakhat Banna का स्थान बना देंगे। कुछ दिनों बाद उनकी गाय भी मिल गई। ये देखकर सभी ने बड़ा अचम्भा किया ओर मान गए कि नखत सिद्ध है लेकिन स्थान को बात को भूल गए। दो दिन बाद जबर सिंह के लड़के के पेट मे दर्द व घुटन सी हो गयी। तब रामूजी सोनार को बुलाया गया , रामूजी सोनार ओर नखत बन्ना सा मे बड़ी घनिशता थी। शुरू मे रामूजी व बन्ना सा ने फोटो भी साथ – साथ खिचवाया हुआ था | रामूजी सोनार के विवाह मे ऊंट भी Nakhat बन्ना सा ही लेकर गए थे। रामूजी सोनार ने जबर सिंह के लड़के के पेट मे घुटन देखकर कांजी की ढनी मे ज्योत करने को कहा, घरवालो ने ज्योत करके रामूजी को देदी तब नखत बन्ना सा ने बहन सुगना के मुख से कहा कि मेरे स्थान आपने कहकर भी नहीं बनवाया है। क्या बात है ? जब जबर सिंह व कान सिंह ने कुछ दिनों की छूट लेकर स्थान बनाना शुरू किया वहाँ जागरण लगाया। धीरे – धीरे यह मेला विशाल होने लगा। पास मे एक राई के की लड़की के पेट मे फोड़ा हो गया था। वह बस मरने ही वाली थी कि किसी ने सलाह दी कि बन्ना सा की फेरी व प्र्शाद बोल दो, उसने वैसा ही किया उसके पेट मे से एक फिट लंबा जालधर निकाल गया और तीन दिन मे ठीक हो गई |
भारत एक ऐसा देश है जहां पर सबसे ज्यादा त्यौहार मनाये जाते है। होली और दीवाली हिन्दुओ के दो बड़े त्यौहार है। त्यौहार के साथ साथ यहां पर बहुत सारे व्रत किये जाते है अपनी इच्छा की पूर्ति या कोई मनोकामनाये पूरी होने पर ज्यादातर व्रत किये जाते है, व्रत या उपवास रखने की परम्परा सदियों से चली आ रही है और हिन्दू धर्म वर्तो का अपना महत्व है। हर व्रत किसी ना किसी भगवान या देवी माता से जुड़ा होता है। हर व्रत के पीछे एक कथा भी जरूर होती है। जिसमे बताया गया होता है इस व्रत को करने से क्या फायदा होता है या इस व्रत की शुरुवात कैसी हुयी। आइये जानते है इस वर्ष 2025 में आने वाले व्रत और त्योहारों के बारे में। व्रत -त्यौहार 2025 के साथ उनसे जुडी कथा और व्रत करने का तरीका और पूजा विधि का लिंक भी साथ में दिया गया है।
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Jotram baba ki aarti 1
— गुरु भभूता सिद्ध देश पित्र जोतराम जी आराधना —
दोहा ;समदर्शियो के दरबार में जाई बारम्बार
भूली रह बता दे गुरु बड़े दातार ||
जय गुरु भभूता सिद्ध देवा, जय बाबा जोतराम देवा |
बाबा तुम बिन और न दूजा, किसकी आस करू पूजा ||
सूक्ष्म तेज रूप तुम्हारा, आत्म ज्ञान सदा उजियारा |
संकट हरण – कर्ण सुख दाता, सदा फूल मूल पितु माता ||
कहलाते कलयुग का देवता, सेवको के संकट दूर हरो |
भक्ति मुक्ति के हो दाता, तुम बिन सतगुरु मार्ग नही पाता ||
बाबा हम जन सेवक तुम गुरु दाता, बाबा सरणं करू किसकी |
बाबा तन मन धन सब कुछ तेरा, तेरे गुण गाने से मिट जा चौरासी फेरा ||
बाबा हम मुर्ख तुम ज्ञानी, किरपा करो गुरु दाता |
बाबा जिस घर आपका दासा, चार कूट में नाम फल आपका पाता ||
बाबा छिन्न भिन्न करो मोहमाया, जो सेवक सरन तुम्हारी आया |
बाबा दया का हाथ बढावो, सेवको को भक्ति सागर रूप दिखावो ||
मन ध्यान वचन करे गुरु सेवा, यही मिले उत्तम मेवा |
गुरु दाता की जो सेवक आरती गावे, मोक्ष मुक्ति इच्छा फल पावे ||
जोतराम बाबा आरती in Hinglish
Jai Guru bhbhuta sidh dewa, jai baba jotram dewa. baba tum bin or na duja, kiski aas karu pooja.
suksham tej rup tumhara, aatam gyan sadda ujiyara. sankat haran-karan sukh data, sadda ful mul pittr mata.
kahlate kalyug ka devta, sewko ke sankat door haro, bhagi mukti ke ho data, tum bin satguru marg nahi pata.
Baba hum jan sewak tum guru data, baba saran karu kiski, baba tan man dhan sab tera, tere gun gaane se mit jaye chorasi fera.
Baba hum murkh tum gyani, Kirpya karo guru data, Baba jis ghar apka dasa, chaar kut me naam fal apka pata.
baba chinn bhinn karo mohmaya, jo sewak saran tumhari aaya. Baba daya ka hath badhao, sewko ko bhagti saagar rup dikhao.
man dhayan vachan kare guru sewa, yahin mile uttam mewa. Guru Data ki Jo Sewak aarti gave, moksh mukti icha fal panve.
Jotram Baba Aarti 2
ॐ जय जोतराम हरे, देवा जय जोतराम हरे दीन दुखी का दुखड़ा पल में बाबा दूर करे – 2 ।। ॐ जय…. परमार्थ करने का मन में ढृढ़ निश्चय करे, भभूता सिद्ध गुरु जी आशा पूरी करे।। ॐ जय…. काया त्याग कर निर्देह होकर जन पर उपकार करे जो ध्यावे फल पावे पूरी मुराद करे ।। ॐ जय…. कहलाता कलयुग का देवता बाँझो की गोद भरे देता भभूती की पुड़िया विपदा दूर करे ।। ॐ जय…. साचो का है संगाती पूर्ण काज करे कपटी जन से हरदम रहता परे ।। ॐ जय…. सेवा पूजा जोतराम जी की जो नित नेम करे व्यापे नहीं कोई चिंता पुरे भण्डार भरे ।। ॐ जय…. जोतराम जी की आरती जो कोई जन करे कहे जगदीश उसके बिगड़े काम बने ।। ॐ जय…. ॐ जय जोतराम हरे, देवा जय जोतराम हरे….
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वेद दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ है। इसी के आधार पर दुनिया के अन्य मजहबों की उत्पत्ति हुई जिन्होंने वेदों के ज्ञान को अपने अपने तरीके से भिन्न भिन्न भाषा में प्रचारित किया। वेद ईश्वर द्वारा ऋषियों को सुनाए गए ज्ञान पर आधारित है इसीलिए इसे श्रुति कहा गया है। सामान्य भाषा में वेद का अर्थ होता है ज्ञान। वेद पुरातन ज्ञान विज्ञान का अथाह भंडार है। इसमें मानव की हर समस्या का समाधान है। वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम, इतिहास, रीति-रिवाज आदि लगभग सभी विषयों से संबंधित ज्ञान भरा पड़ा है।
शतपथ ब्राह्मण के श्लोक के अनुसार अग्नि, वायु और सूर्य ने तपस्या की और ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को प्राप्त किया। प्रथम तीन वेदों को अग्नि, वायु, सूर्य (आदित्य), से जाड़ा जाता है और संभवत: अथर्वदेव को अंगिरा से उत्पन्न माना जाता है। एक ग्रंथ के अनुसार ब्रह्माजी के चारों मुख से वेदों की उत्पत्ति हुई।
वेद सबसे प्राचीनतम पुस्तक हैं इसलिए किसी व्यक्ति या स्थान का नाम वेदों पर से रखा जाना स्वाभाविक है। जैसे आज भी रामायण, महाभारत इत्यादि में आए शब्दों से मनुष्यों और स्थान आदि का नामकरण किया जाता है।
Vedo Ka Itihas Jaane
वेद मानव सभ्यता के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं। वेदों की 28 हजार पांडुलिपियाँ भारत में पुणे के ‘भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ में रखी हुई हैं। इनमें से ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियाँ बहुत ही महत्वपूर्ण हैं जिन्हें यूनेस्को ने विरासत सूची में शामिल किया है। यूनेस्को ने ऋग्वेद की 1800 से 1500 ई.पू. की 30 पांडुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि यूनेस्को की 158 सूची में भारत की महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की सूची 38 है।
वेदो के चार भाग है – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। there is the 4 parts of vedas – Rigveda, Atharveda, samveda and Yajurveda (ऋग-स्थिति), (यजु-रूपांतरण), (साम-गतिशील) और (अथर्व-जड़)। ऋक को धर्म, यजुः को मोक्ष, साम को काम, अथर्व को अर्थ भी कहा जाता है। इन्ही के आधार पर धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र और मोक्षशास्त्र की रचना हुई।
ऋक अर्थात् स्थिति और ज्ञान ऋग्वेद सबसे पहला वेद है जो पद्यात्मक है। इसके 10 मंडल (अध्याय) में 1028 सूक्त है जिसमें 11 हजार मंत्र हैं। इस वेद की 5 शाखाएं हैं – शाकल्प, वास्कल, अश्वलायन, शांखायन, मंडूकायन। इसमें भौगोलिक स्थिति और देवताओं के आवाहन के मंत्रों के साथ बहुत कुछ है। ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियां और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है। इसमें जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा का आदि की भी जानकारी मिलती है। ऋग्वेद के दसवें मंडल में औषधि सूक्त यानी दवाओं का जिक्र मिलता है। इसमें औषधियों की संख्या 125 के लगभग बताई गई है, जो कि 107 स्थानों पर पाई जाती है। औषधि में सोम का विशेष वर्णन है। ऋग्वेद में च्यवनऋषि को पुनः युवा करने की कथा भी मिलती है।
यजुर्वेद का अर्थ : यत् + जु = यजु। यत् का अर्थ होता है गतिशील तथा जु का अर्थ होता है आकाश। इसके अलावा कर्म। श्रेष्ठतम कर्म की प्रेरणा। यजुर्वेद में यज्ञ की विधियां और यज्ञों में प्रयोग किए जाने वाले मंत्र हैं। यज्ञ के अलावा तत्वज्ञान का वर्णन है। यह वेद गद्य मय है। इसमें यज्ञ की असल प्रक्रिया के लिए गद्य मंत्र हैं। इस वेद की दो शाखाएं हैं शुक्ल और कृष्ण। कृष्ण :वैशम्पायन ऋषि का सम्बन्ध कृष्ण से है। कृष्ण की चार शाखाएं हैं। शुक्ल : याज्ञवल्क्य ऋषि का सम्बन्ध शुक्ल से है। शुक्ल की दो शाखाएं हैं। इसमें 40 अध्याय हैं। यजुर्वेद के एक मंत्र में च्ब्रीहिधान्यों का वर्णन प्राप्त होता है। इसके अलावा, दिव्य वैद्य और कृषि विज्ञान का भी विषय इसमें मौजूद है।
साम का अर्थ रूपांतरण और संगीत। सौम्यता और उपासना। इस वेद में ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप है। सामवेद गीतात्मक यानी गीत के रूप में है। इस वेद को संगीत शास्त्र का मूल माना जाता है। 1824 मंत्रों के इस वेद में 75 मंत्रों को छोड़कर शेष सब मंत्र ऋग्वेद से ही लिए गए हैं।इसमें सविता, अग्नि और इंद्र देवताओं के बारे में जिक्र मिलता है। इसमें मुख्य रूप से 3 शाखाएं हैं, 75 ऋचाएं हैं।
अथर्व का अर्थ है कंपन और अथर्व का अर्थ अकंपन। ज्ञान से श्रेष्ठ कर्म करते हुए जो परमात्मा की उपासना में लीन रहता है वही अकंप बुद्धि को प्राप्त होकर मोक्ष धारण करता है। इस वेद में रहस्यमयी विद्याओं, जड़ी बूटियों, चमत्कार और आयुर्देद आदि का जिक्र है। इसके 20 अध्यायों में 5687 मंत्र है। इसके आठ खण्ड हैं जिनमें भेषज वेद और धातु वेद ये दो नाम मिलते हैं।
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Bhagwat Geeta Hindi PDF Download
Shrimad Bhagwat geeta Audio- एक रहसयमय ग्रंथ है जिसमे सभी वेदो और जीवन का सार दिया गया है जो भी मनुस्य साफ़ मन से और ध्यान लगा कर गीता को पढता है उसके सभी दुःख , शोक , भय , चिंताओं को Bhagwan Vishnu हर लेते है जो मनुष्य हमेशा Gita को पढता उसमे बताई गयी बातो को अपने जीवन में धारण करता है उसके पिछले जन्म और इस जन्म में किये हुए सभी पाप ख़तम हो जाते है पानी से स्नान करने पर इस देह का मैल साफ होता है लेकिन Geeta रूपी अमृत जल से किया हुआ स्नान आत्मा के मैल को भी खत्म कर देता है जो मनुष्य श्री krishan Bhagwan के मुख से बताई इस गीता को समझ जाता है वो मनुष्य इस संसार में बार बार जन्म लेने के बंधन से मुक्त हो जाता है अर्थात मोक्ष को प्राप्त होता है
गीता के 18 अध्याय है जो इस प्रकार है Bhagavad Gita audio
01-11 : दोनों सेनाओ के शुर वीरो की गणना प्रसंग | 12-19 :दोनों सेनाओ की संख ध्वनि प्रसंग | 20-27 :अर्जुन के द्वारा सेना का निरक्षण 28-47 :मोह में आ कर अर्जुन के का शोकाकुल होना
अध्याय 2 – सांख्य योग bhagwat geeta hindi
01-10 : अर्जुन की कायरता विषय पर कृष्ण – अर्जुन की बाते 11-30 :सांख्ययोग विषय 31-38 :क्षत्रिय धर्म के अनुसार युद्ध करने की सिख 39-53 :कर्म योग का विषय 54-72 :स्थिर बुद्धि पुरुष के लक्षण और उसकी महिमा
अध्याय 3 – कर्म योग bhagwat geeta in hindi
01-7 : ज्ञान योग और कर्मयोग के अनुसार अनासक्त भाव से नियत कर्म करने की श्रेष्ठा का निरक्षण करना 08-16 :यज्ञादि कर्मो की आवश्यकता का निरक्षण 17-24 :ज्ञानवान और भगवान के लिए लोक संग्राथ कर्मो की आवश्यकता 25-34 :अज्ञानी और ज्ञान के लक्षण व द्वैष रहित होकर कर्म करने के लिए प्रेरणा 35-43 :काम के निरोध का विषय
अध्याय 4 -ज्ञान कर्म सन्यास योग bhagavad gita pdf
01-18 :सगुण भगवान का प्रभाव और कर्म योग का विषय 19-23 :योगी महात्माओ के आचरण और उनकी महिमा 24-32 :फल सहित अलग अलग यज्ञो का कथन 33-42 :ज्ञान की महिमा
अध्याय 5 – कर्मसन्यास योग bhagwat geeta hindi pdf
01-6 :सांख्य योग और कर्म योग का निर्णय 07-12 :सांख्य योगी और कर्मयोगी के लक्षण और महिमा 13-26 :ज्ञान योग का विषय 27-29 : भक्ति सहित ध्यान का विषय
अध्याय 6 -आत्म संयम योग bhagwat geeta in hindi pdf
01-4 :कर्म योग का विषय और योगारूढ़ पुरुष के लक्षण 05-10 :आत्म- उद्धार के लिए प्रेरणा और भगवत्प्राप्त पुरुष के लक्षण 11-32 :ध्यान योग का विषय विस्तार से 33-36 :मन के निग्रह का विषय 37-47 :योग भ्रष्ट पुरुष की गति का विषय और ध्यान योगी की महिमा
अध्याय 7 – ज्ञान विज्ञानं योग bhagwat geeta pdf in hindi
01-7 :विज्ञानं सहित ज्ञान का विषय 08-12 :सम्पूर्ण पर्दार्थो में कारण रूप से भगवान की व्यापकता का कथन 13-19 :आसुरी सवभाव वालो की निंदा और भगवत भक्तो की निंदा 20-23 :अन्य देवतावो की उपासना का विषय 24-30 :भगवान के प्रभाव और सवरूप को न जानने वालो की निंदा और जानने वालो की महिमा
अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्मा योग bhagavad gita audio
01-7 :ब्रह्मा , अध्यात्म और कर्मो के विषय में अर्जुन के प्रश्न और उनका उतर
08-22 :भक्ति योग का विषय
23-28 :शुक्ल और कृष्णमार्ग का विषय
अध्याय 9 – राजविधा राजगुरहा योग bhagwat geeta read in hindi
01-6 :प्रभाव सहित ज्ञान का विषय 07-10 :जगत की उत्पति का विषय 11-15 :भगवान का तिरस्कार करने वाले आसुर प्रविति वालो की निंदा और देव प्रवित्ति वालो के भक्तजनो के प्रकार 16-19 :सर्वात्तम रूप से प्रभाव सहित भगवान स्वरूप का वर्णन 20-25 :सकाम और निष्काम उपासना का फल 26-34 : निष्काम भगवान भक्ति की महिमा
अध्याय 10 – विभूति योग bhagavad gita quotes hindi
01-7 :भगवन की विभूति और योग शक्ति का कथन और उनके जानने का फल 08-11 :फल और प्रभाव सहित भक्ति योग का कथन 12-18 : अर्जुन द्वारा भगवान की स्तुति तथा विभूति और योग शक्ति को कहने के लिए प्रार्थना
अध्याय 11 – विश्र रूप दर्शन योग bhagwat geeta saar in hindi
01-4 :विश्र रूप के दर्शन हेतु अर्जुन की प्रार्थना 05-8 :भगवान द्वारा अपने विश्र रूप का वर्णन 09-14 :संजय द्वारा विश्र रूप का वर्णन 15-31 :अर्जुन द्वारा भगवान के विश्र रूप का देखा जाना और उनकी स्तुति करना 32-34 :भगवान् द्वारा अपने प्रभाव का वर्णन और अर्जुन को युद्ध के लिए उत्साहीत करना 35-46 :भयभीत होने पर अर्जुन के द्वारा भगवान कृष्णा की स्तुति और चतुर्भुज रूप का दर्शन कराने के लिए निवेदन करना 47-50 :भगवान द्वारा अपने विश्र रूप के दर्शन की महिमा का कथन तथा चतुर्भुज और सौम्यरूप का दिखाया जाना 51-55 :बिना अन्नय भक्ति के चतुर्भुजरूप के दर्शन की दुर्लभता और फल सहित अन्नय भक्ति का कथन
अध्याय 12 -भक्ति योग bhagwat geeta saar
01-12 :साकार और निराकार के उपासको की उत्तमता का निर्णय और भगवत प्राप्ति के उपाय का विषय 13-20 :भगवत- प्राप्त पुरुषो के लक्षण
अध्याय 13 – क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग bhagwat geeta katha
01-18 :ज्ञान सहित क्षेत्र-क्षेत्र का विषय 19-34 :ज्ञान सहित प्रक़ति पुरुष का विषय
अध्याय 14 – गुणत्रय विभाग योग bhagwat geeta download
01-4 :ज्ञान की महिमा और प्रकति -पुरुष से जगत की उत्पति 05-18 :सत् ,रज , तम – तीनो गुणों का विषय 19-27 :भगवत्प्राप्ति का उपाय और गुणातीत पुरुष के लक्षण
अध्याय 15 – पुरुषोतम योग bhagwat geeta hindi mein
01-6 :संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति उपाय 07-11 :जीवात्मा का विषय 12-15 :प्रभाव सहित पर्मेश्वर के स्वरूप का विषय 16-20 : श्रर , अक्षर , पुरषोतम का विषय
अध्याय 16 – देवासुर संपधिभाग योग bhagwat geeta song
01-5 :फल सहित देवी और आसुरी सम्पदा का विषय 06-20 :आसुरी सम्पदा वालो के लक्षण और उनकी अधोगति का कथन 21-24 :शास्त्र विपरीत आचरणों को त्यागने और शास्त्रानुकूल आचरणों के लिए प्रेरणा
अध्याय 17 – श्रद्धात्रय विभाग योग bhagwat geeta ka saar
01-6 :श्रद्धा का और शास्त्र विपरीत घोर तप करने वालो का विषय 07-22 :आहार ,यज्ञ , तप ,और दान के अलग अलग भेद 23-28 :ॐ तत्सत के प्रयोग की व्याख्या
अध्याय 18 – मोक्ष सन्यास योग bhagwat geeta updesh
0 1-12 :त्याग का विषय 13-18 :कर्मो के होने में सांख्य सिद्धांत का विषय 19-40 :तीनो गुणों के अनुसार ज्ञान , कर्म ,कर्ता , बुद्धि , धृति और सुख के अलग अलग भेद 41-48 :फल सहित वर्ण धर्म का विषय 49-55 :ज्ञान निष्ठां का विषय 56-66 :भक्ति सहित कर्म का विषय 67-78 :श्री गीता जी का माहात्म्य
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जोतराम बाबा आरती
ॐ जय जोतराम हरे, देवा जय जोतराम हरे दीन दुखी का दुखड़ा पल में बाबा दूर करे – 2 ।। ॐ जय….
परमार्थ करने का मन में ढृढ़ निश्चय करे, भभूता सिद्ध गुरु जी आशा पूरी करे।। ॐ जय….
काया त्याग कर निर्देह होकर जन पर उपकार करे जो ध्यावे फल पावे पूरी मुराद करे ।। ॐ जय….
कहलाता कलयुग का देवता बाँझो की गोद भरे देता भभूती की पुड़िया विपदा दूर करे ।। ॐ जय….
साचो का है संगाती पूर्ण काज करे कपटी जन से हरदम रहता परे ।। ॐ जय….
सेवा पूजा जोतराम जी की जो नित नेम करे व्यापे नहीं कोई चिंता पुरे भण्डार भरे ।। ॐ जय….
जोतराम जी की आरती जो कोई जन करे कहे जगदीश उसके बिगड़े काम बने ।।
ॐ जय…. ॐ जय जोतराम हरे, देवा जय जोतराम हरे….
भजन – श्री जोतराम आरती भजन गायक – Unknown श्रेंणी – जोतराम भजन
बाबा जोतराम आरती ऑडियो
भगतो श्री जोतराम जी की आरती को अब आप MP3 Audio, PDF Format व फोटो के रूप में वेबसाइट पर उपलब्ध करवाया गया है. आरती 3 तरह के डिजाईन में मोजूद है. प्रिंट आउट निकलवाने के लिए PDF डाउनलोड करे और फ़ोन में रखने के लिए फोटो को डाउनलोड करे व आरती सुनने के लिए MP3 डाउनलोड की जा सकती है और साथ में आरती की विडियो भी डाउनलोड कर सकते है.