नखत बन्ना कहानी Nakhat Banna Story

Nakhat Banna Jivan Katha नखत बन्ना सा

Nakhat Banna बन्ना जी की  मान्यता पुरे राजस्थान में है ,जब भभूता सिद्ध जी ने अपना शरीर छोड़ा था  उस वक़्त एक भविष्य वाणी हुयी थी  की तुम्हारे परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी पीर पैदा होते रहेंगे , और उसी  भविष्य वाणी के के कारण समय आने पर नखत बन्ना सा  जो की  भभूता सिद्ध जी के पोते थे उन्होंने शरीर छोड़ा और देव  जूनी में आ गए , आज पुरे राजस्थान में इनके चमत्कार देखे जाते है ,

Nakhat banna Story : Rajasthan के जेसलमेर District के गाँव गिरासर की ढाणी सोलंकी के रहने वाले गोविंद सिंह जी के कोई ओलद नहीं थी | वे Rajput जाति से Belong करते थे Niranjan Nath जी ने किर्पा करके धुणे की भभूति गोविन्द सिंह जी को दी थी भभूती के प्रताप से Govind Singh Solanki के यहाँ समय के साथ 4 बच्चो ने जन्म लिया जिनके नाम Bhabhuta, Sher Singh, Narsingh और बेटी का नाम सिंगारो रखा गया।
Bhabhuta Sidh जी के Kali Nadi मे शरीर त्यागने के कुछ समय बाद जिस जगह भभूता Sidh जी का रिश्ता किया गया था वहां उनके छोटे भाई शेरसिंह का विवाह किया गया। शेर सिंह जी के पुत्र अलसी सिंह जी के 3 पुत्रो ने जन्म लिया प्रलाद Singh जी , जबर Singh जी और कानाह Singh जी, प्रलाद सिंह जी का Shaadi के 2 महीने बाद ही देहांत हो गया। कानाह सिंह जी के यहाँ सबसे पहले पुत्री ने जन्म लिया जिसका नाम सुगना कंवर रखा गया। दूसरे नंबर पर Nakhat Banna ने जन्म लिया। उनके बाद Bhagwan Singh जी, भीख Singh जी, रूप singh जी, बाबू singh जी और जीवण singh जी पाँच भाइयों ने जन्म लिया।

ये 7 भाई बहन थे। कानाह Singh जी की Family मे मांस और शराब का नाम तक नहीं लिया जाता अगर कोई रिस्तेदार शराब पिया हुआ मिल जाए तो ये लोग उससे कोई बात नहीं करते ये उनकी विषेश नियम धारा है | दादी सा श्रीमति बादल देवी के बताए अनुसार कानाह सिंह जी की धर्म पत्नी का नाम सीरिया देवी था जोकि ग्राम गिरासर की थी | Nakhat Banna का जन्म विक्रम संवत 2011 मे फागुन लगते तीज मंगलवार को हुआ था। Nakhat Banna sa Solanki Dhani की मिट्टी मे खेल कूदकर बड़े हुए, इन्होने 2 -3 साल तक होमगार्ड की नौकरी की , ये अपने गांव के वफादार और ईमानदार होने के कारण संवत 2025 -26 मे गेंग का पूरा काम नखत Banna sa को सौपा गया था और उनके अंतिम Time तक अकाल राहत के मिस्टरोल Nakhat बन्ना सा के पास थे | एक बार Nakhat Banna सा के बीमार होने के कारण काम पर ना जाने के कारण चार-पाँच लोग बन्ना सा की ढनी पहुंचे और हाथ जोड़कर कहा कि Banna sa आपके काम पर ना होने के कारण पाँच-सात दिन से हमारी Attendance भी नहीं भरी गई, तब नखत बन्ना सा ने जवाब दिया कि आप लोग अपनी हाजरियों का मिस्टरोल ले जाओ व मेरी बाट मत देखना, मुझे तो अब सांप पकड़ने हैं और हाथ को छत की तरफ करते हुए कहां “ देखो वो जा रहे है सांप ” ये Nakhat बन्ना सा के आंखरी शब्द थे।

Nakhat Banna
जब गाँव वालों को मिस्टरोल ले जाने को कहा तो अनपढ़ लोग कहने लगे कि आपके इन मिस्टरोल मे झूठ सच होगी तो हम गरीब लोग फंस जाएंगे। लेकिन banna sa ने उनको कहा कि इसमे रत्ती भर भी झूठ नहीं है तुम इन्हे ले जाओ। इसके बाद तीसरे दिन विक्रम संवत 2026 के दस्वे दिन चैत महा लगते ही वीरवार को साधारण बुखार मे अपना शरीर त्याग दिया। घर मे हाहाकार मच गया। घर मे सबसे बड़ा लड़का वो भी 17 साल की उम्र मे मामूली बुखार मे चल बसे इससे बढ़कर ओर क्या दुख होगा ? कानाह सिंह जी को इस घटना से बड़ा झटका लगा उनका मन विचलित हो गया। उन्हे इस बात का बेहद अफसोस हुआ कि 40 साल से दादा Bhabhuta Sidh की सेवा तन मन धन से कर रहे थे ओर मेले मे हर साल काली नाड़ी भी थे जिसका मुझे आज ये फल मिला लेकिन भगवान की मर्जी के आगे किसकी चलती है।
सेवा पूजा अब दादी ने संभाली लेकिन दादा सा ने उस गम गो भुलवा दिया ओर कहा कि सेवा मत छोडना तुम्हारे घर के आगे मेला लगेगा। तब नखत बन्ना सा के पिता मन कुछ तसल्ली मिली।
विक्रम संवत 2036 में नखत बन्ना अपनी बहन सुगना के मुख बोले और कहा
“मैं नखत हु ओर मेरा स्थान बोरटी के पास बनाओ “।

नखत बन्ना चमत्कार 1:-एक परिवार मे बच्चे को सांप ने काट लिया और वह मर गया था। तब श्री नखत बन्ना सा स्वम वहाँ मोलिया साफा और हाथ मे चुटिया रस्सी लेकर पहुंचे ओर कहा “कि मुझे पानी पिलाओ “इस पर वहाँ मोजूद लोगों ने कहा कि भाई यहाँ तो एकलोता लड़का मरा पड़ा है आप पास वाले घर मे पानी पिलो बन्ना सा आँगन मे पहुंचे ओर शव के ऊपर से कपड़ा हटाते हुए कहा कि भाई उठजा इतनी गहरी नींद मत लो, लड़का जीवित खड़ा हो गया और सभी लोग हैरान रह गए ओर पुंछने लगे कि आप कौन है ? तब उन्होने कहा कि मैं कानाह सिंह जी सोलंकी का लड़का हूँ ओर चारणवाला नहर के पास मेरी ढनी है, आपका भला हुआ है तो ढनी के पास मे बोरटी व्रक्ष कि फेरी लगाने इस लड़के को ले आना ,इतना कहकर Banna सा ने पानी नहीं पिया और घर के बाहर चले गए। वे लोग पुंछते – पुंछते गए ओर फेरी लगाई तब से वह लड़का भदवे की शूकल पक्ष की चौथ को वहाँ फेरी लगाने आता है और हमेशा आता रहेगा।

नखत बन्ना चमत्कार 2 :- नखत बन्ना सा के चमत्कार सुनकर अंधी दादी सा बादल देवी ने कहा “ नखतू लोग कहते है हमारा भला होता है और Nakhat Sidh है, तो मुझे भी आंखे दे दे, मुझे भी विश्वास हो जाएगा की हमारा नखत सिंह सिद्ध हो गया है ” दूसरे दिन प्रातः तीन बजे दादी सा को नखत सिंह ने पूकारा दादी उठ जा तुझे दिखाई देगा ओर बिलोना शुरू कर दे। दादी सा ने पुंछा तू कौन है भाई ? तो नखत बन्ना सा ने जवाब दिया कि मैं नखत हूँ। लेकिन दादी को विश्वास नहीं हुआ और उन्होने कहा वह तो 10 साल पहले संसार छोड़ चुका है अब नखतू कहाँ ? दादी सा आप बाहर आजाओ आपने कल याद किया था कि नखत सिद्ध होवे तो मुझे भी आंखे क्यों नहीं देता – मैं आपको आंखे देने आया हूँ , तब दादी सा उठी ओर उन्हे दिखने लगा था। वे बड़ी खुश हुई, सवेरे जब पोतों की बहुए उठी तो दादी सा को देख हंस पड़ी ओर फिर उन्हे हेरनी हुई जब उन्हे मालूम हुआ कि बन्ना सा ने दादी को आंखे दी हैं। विक्रम संवत 2036 भदवे की चाँदनी छट का कालिया नाड़ी का मेला पूरा करके जब कानाह सिंह जी घर पहुंचे तब दादी सा बाहर आगाई ओर अपनी आप बीती सुनाई।

नखत बन्ना चमत्कार 3 :- एक दिन काका सा जबर सिंह जी ने कहा मेरी गाय 3 साल से गायब है अगर वो मिल जाए तो Nakhat Banna का स्थान बना देंगे। कुछ दिनों बाद उनकी गाय भी मिल गई। ये देखकर सभी ने बड़ा अचम्भा किया ओर मान गए कि नखत सिद्ध है लेकिन स्थान को बात को भूल गए। दो दिन बाद जबर सिंह के लड़के के पेट मे दर्द व घुटन सी हो गयी। तब रामूजी सोनार को बुलाया गया , रामूजी सोनार ओर नखत बन्ना सा मे बड़ी घनिशता थी। शुरू मे रामूजी व बन्ना सा ने फोटो भी साथ – साथ खिचवाया हुआ था | रामूजी सोनार के विवाह मे ऊंट भी Nakhat बन्ना सा ही लेकर गए थे। रामूजी सोनार ने जबर सिंह के लड़के के पेट मे घुटन देखकर कांजी की ढनी मे ज्योत करने को कहा, घरवालो ने ज्योत करके रामूजी को देदी तब नखत बन्ना सा ने बहन सुगना के मुख से कहा कि मेरे स्थान आपने कहकर भी नहीं बनवाया है। क्या बात है ? जब जबर सिंह व कान सिंह ने कुछ दिनों की छूट लेकर स्थान बनाना शुरू किया वहाँ जागरण लगाया।
धीरे – धीरे यह मेला विशाल होने लगा।
पास मे एक राई के की लड़की के पेट मे फोड़ा हो गया था। वह बस मरने ही वाली थी कि किसी ने सलाह दी कि बन्ना सा की फेरी व प्र्शाद बोल दो, उसने वैसा ही किया उसके पेट मे से एक फिट लंबा जालधर निकाल गया और तीन दिन मे ठीक हो गई |

ऐसे ही हज़ारो चमत्कार नखत बन्ना सा कर चुके है , आज इनके धाम पर दुखियो ताँता लगा रहता है

16 टिप्पणी

Leave a Reply